7 Apr 2026, Tue

मचने वाली है तबाही! ईरान पर हमले के लिए तैनात हैं अमेरिका की घातक लंबी दूरी वाली मिसाइलें

America-Iran-Israel Conflict: JASSM-ER और Tomahawk मिसाइलों का बढ़ता इस्तेमाल, जानें पूरा अपडेट

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव और सैन्य टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस संघर्ष में आधुनिक हथियारों और मिसाइलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। हाल के घटनाक्रम में अमेरिका द्वारा टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों के साथ-साथ उन्नत JASSM-ER क्रूज मिसाइलों की तैनाती ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

इस सैन्य अभियान के दौरान अमेरिका ने सैकड़ों Tomahawk Cruise Missile का इस्तेमाल किया है। युद्ध से पहले अमेरिका के पास लगभग 4,000 टॉमहॉक मिसाइलों का भंडार था। ये मिसाइलें लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम होती हैं और इन्हें समुद्री और जमीनी दोनों प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है।

अब अमेरिका अपनी अत्याधुनिक JASSM-ER (Joint Air-to-Surface Standoff Missile-Extended Range) मिसाइलों को भी सक्रिय रूप से तैनात कर रहा है। ये मिसाइलें 600 मील से अधिक दूरी तक उड़ान भरने में सक्षम हैं और इन्हें इस तरह डिजाइन किया गया है कि ये दुश्मन की रडार और एयर डिफेंस सिस्टम से बचकर लक्ष्य को भेद सकें। इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से स्टेल्थ ऑपरेशनों और हाई-प्रिसीजन स्ट्राइक के लिए किया जाता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने अपने स्टॉक से बड़ी संख्या में JASSM-ER मिसाइलों को निकालकर विभिन्न क्षेत्रों में तैनात करने का आदेश दिया है। इस समय अमेरिका के पास लगभग 2,300 JASSM-ER मिसाइलों का भंडार है, लेकिन इसमें से केवल करीब 425 मिसाइलें ही अन्य क्षेत्रों के लिए उपलब्ध बची हैं। लगभग 75 मिसाइलें तकनीकी खराबी या क्षति के कारण उपयोग के लायक नहीं हैं।

इन मिसाइलों की क्षमता इतनी है कि लगभग 17 B-1B बमवर्षक विमान एक ही मिशन में इन्हें इस्तेमाल कर सकते हैं। अमेरिका का यह कदम दर्शाता है कि वह अपने सैन्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर रणनीतिक बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रहा है।

इसके अलावा, अमेरिका के पास JASSM का एक कम दूरी वाला संस्करण भी मौजूद है, जिसकी रेंज लगभग 250 मील है। इन मिसाइलों का उपयोग सैनिकों के लिए जोखिम को कम करने के लिए किया जाता है, क्योंकि ये सुरक्षित दूरी से लक्ष्य पर हमला कर सकती हैं।

संघर्ष के दौरान, अमेरिका और इजरायल ने दावा किया है कि उन्होंने ईरान की हवाई सुरक्षा का एक बड़ा हिस्सा नष्ट कर दिया है। इससे अब वे कम खर्चीले और अधिक प्रभावी हथियारों का उपयोग करके ईरान के अंदर लक्ष्यों को निशाना बना सकते हैं।

दूसरी ओर, ईरान भी इस संघर्ष में पीछे नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अब तक इस क्षेत्र में 1,600 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें और लगभग 4,000 शाहेद ड्रोन दागे हैं। इन हमलों को रोकने के लिए हजारों इंटरसेप्टर मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का भारी सैन्य उपयोग वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय है, क्योंकि इससे न केवल क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित होती है, बल्कि हथियारों की खपत और सैन्य रणनीतियों पर भी बड़ा असर पड़ता है।

कुल मिलाकर, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच यह टकराव आधुनिक युद्ध तकनीक के बढ़ते उपयोग को दर्शाता है, जहां अत्याधुनिक मिसाइलें और स्टेल्थ टेक्नोलॉजी भविष्य के युद्धों की दिशा तय कर रही हैं।

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