शहबाज शरीफ की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ बैठक में मौजूदगी चर्चा में, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
वॉशिंगटन/इस्लामाबाद। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर गठित रणनीतिक मंच Board of Peace की पहली बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की भागीदारी अंतरराष्ट्रीय हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। बैठक के दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान को मंच पर अपेक्षित महत्व नहीं मिला। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
क्या है बोर्ड ऑफ पीस?
बोर्ड ऑफ पीस को गाजा में शांति स्थापना, पुनर्निर्माण और स्थिरता के लिए एक बहुपक्षीय पहल के तौर पर पेश किया गया है। मंच का उद्देश्य सदस्य देशों से आर्थिक सहयोग और संभावित शांति सेना के लिए सैनिक योगदान जुटाना बताया गया है।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका ने गाजा पुनर्निर्माण के लिए 10 अरब डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है। वहीं कतर, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों ने भी आर्थिक सहयोग का वादा किया है। United Nations ने मानवीय सहायता के लिए 2 अरब डॉलर की घोषणा की है, जबकि FIFA ने खेल परियोजनाओं के लिए 7.5 करोड़ डॉलर देने की बात कही है।
पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल
बैठक के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई कि पाकिस्तान ने न तो स्पष्ट आर्थिक प्रतिबद्धता जताई और न ही शांति सेना के लिए सैनिक भेजने की घोषणा की। आधिकारिक बयान में पाकिस्तान ने शांति प्रक्रिया का समर्थन दोहराया, लेकिन किसी ठोस वित्तीय या सैन्य योगदान की सार्वजनिक घोषणा नहीं की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में बड़े वित्तीय वादे करना उसके लिए कठिन हो सकता है। हालांकि इस पर पाकिस्तान सरकार की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
ग्रुप फोटो और कूटनीतिक संकेत
वायरल वीडियो में ग्रुप फोटो के दौरान शहबाज शरीफ को पीछे की कतार में खड़ा देखा गया, जिसे लेकर कई तरह की व्याख्याएं की जा रही हैं। कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे आयोजनों में स्थान निर्धारण प्रोटोकॉल और क्रम के आधार पर होता है, और इसे किसी देश की ‘हैसियत’ से जोड़ना उचित नहीं है।
किन देशों ने सैनिक भेजने की पेशकश की?
रिपोर्ट्स के अनुसार, मोरक्को, अल्बानिया, इंडोनेशिया, कजाकिस्तान और कोसोवो जैसे देशों ने संभावित शांति बल में सैनिक भेजने की इच्छा जताई है। इंडोनेशिया ने 8,000 सैनिक भेजने की घोषणा की है। प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (ISF) के लिए कुल 20,000 सैनिकों की जरूरत बताई जा रही है।
सैनिक भेजने वाले देशों की सूची में पाकिस्तान का नाम फिलहाल शामिल नहीं है।
आगे क्या?
पाकिस्तान की भागीदारी को लेकर क्षेत्रीय राजनीति में अलग-अलग आकलन सामने आ रहे हैं। जहां कुछ इसे औपचारिक कूटनीतिक उपस्थिति मान रहे हैं, वहीं आलोचक इसे अवसर चूकने के रूप में देख रहे हैं।
फिलहाल, बोर्ड ऑफ पीस की आगामी बैठकों और सदस्य देशों की ठोस प्रतिबद्धताओं पर दुनिया की नजर बनी हुई है। पाकिस्तान की आगे की रणनीति क्या होगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट हो सकता है।

