Bihar Politics: शराबबंदी पर तेजस्वी यादव के बयान से सियासी घमासान, JDU और RJD में तीखी बयानबाजी
बिहार की राजनीति में एक बार फिर शराबबंदी का मुद्दा गर्मा गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव द्वारा शराबबंदी कानून पर की गई टिप्पणी के बाद राज्य की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (JDU) और विपक्षी RJD आमने-सामने आ गए हैं।
तेजस्वी यादव का बयान
तेजस्वी यादव ने हाल ही में बिहार में लागू शराबबंदी कानून को पूरी तरह विफल करार दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के कारण राज्य में एक समानांतर अवैध व्यवस्था खड़ी हो गई है और भ्रष्टाचार बढ़ा है। उनके इस बयान के बाद सियासी हलकों में बहस तेज हो गई।
JDU का पलटवार
तेजस्वी के बयान के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी JDU ने कड़ा जवाब दिया। JDU नेताओं ने आरोप लगाया कि RJD का शराब कंपनियों से संबंध है और इसी कारण वह शराबबंदी कानून का विरोध कर रही है। पार्टी का कहना है कि RJD ने शराब कंपनियों से कथित तौर पर करोड़ों रुपये का चंदा प्राप्त किया है।
चंदे को लेकर विवाद
JDU के अनुसार, जुलाई 2023 से जनवरी 2024 के बीच RJD को शराब कंपनियों से करीब 46 करोड़ 64 लाख रुपये का चंदा मिला। इसी आधार पर JDU ने RJD की मंशा पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि अगर RJD को शराब कंपनियों से फंड मिला है, तो उसका शराबबंदी के खिलाफ बयान देना राजनीतिक हितों से प्रेरित हो सकता है।
JDU का RJD पर हमला
JDU के प्रदेश अध्यक्ष और प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि शराबबंदी पर सवाल उठाने से पहले RJD को अपनी पार्टी और परिवार के भीतर रायशुमारी करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि RJD को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह शराबबंदी खत्म करने के पक्ष में है या नहीं। JDU ने यह भी आरोप लगाया कि RJD इस मुद्दे पर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।
शराबबंदी कानून का असर
बिहार में वर्ष 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है, जिसे राज्य सरकार ने सामाजिक सुधार के बड़े कदम के रूप में पेश किया था। JDU का दावा है कि इस कानून से राज्य में कई सकारात्मक बदलाव आए हैं और समाज में सुधार देखने को मिला है। वहीं, कुछ विपक्षी दल और आलोचक इसे पूरी तरह सफल नहीं मानते और इसके प्रभाव पर सवाल उठाते हैं।
सियासी माहौल गरम
शराबबंदी को लेकर जारी यह विवाद बिहार की राजनीति को और अधिक गर्म कर रहा है। एक तरफ JDU इस कानून को जनहित में बता रही है, वहीं RJD इसे विफल करार दे रही है। दोनों दलों के बीच जारी यह बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है, जिससे राज्य का राजनीतिक माहौल और गरमाने की संभावना है।
निष्कर्ष
बिहार में शराबबंदी का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। तेजस्वी यादव के बयान और JDU की प्रतिक्रिया ने इस विवाद को और गहरा कर दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मुद्दा राजनीतिक रूप से किस दिशा में जाता है और जनता इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

