4 Apr 2026, Sat

बारामती उपचुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज, सुनेत्रा पवार ने उद्धव ठाकरे को किया फोन, निर्विरोध चुनी जाएंगी या होगा चुनाव?

बारामती उपचुनाव: सुनेत्रा पवार के निर्विरोध चुनाव पर मंथन, उद्धव ठाकरे के फैसले पर टिकी नजरें

महाराष्ट्र की राजनीति में बारामती उपचुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। इस सीट पर संभावित निर्विरोध चुनाव की चर्चा ने सियासी समीकरणों को और दिलचस्प बना दिया है। सूत्रों के मुताबिक Sunetra Pawar ने Uddhav Thackeray से फोन पर बातचीत की है, जिससे यह संकेत मिल रहे हैं कि विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच किसी सहमति की कोशिश जारी है।

जानकारी के अनुसार Nationalist Congress Party (एनसीपी) के Ajit Pawar गुट और महायुति गठबंधन बारामती सीट पर निर्विरोध चुनाव कराने के पक्ष में हैं। दिलचस्प बात यह है कि एनसीपी के Sharad Pawar गुट की भी इस मुद्दे पर सहमति बताई जा रही है। यदि ऐसा होता है, तो यह राज्य की राजनीति में एक दुर्लभ और बड़ा घटनाक्रम होगा, जहां प्रतिद्वंद्वी गुट एक ही उम्मीदवार के समर्थन में दिख सकते हैं।

हालांकि, Indian National Congress का रुख इस समीकरण को जटिल बना रहा है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस बारामती सीट से अपना उम्मीदवार उतारने पर विचार कर रही है। अगर कांग्रेस चुनाव मैदान में उतरती है, तो निर्विरोध चुनाव की संभावना खत्म हो सकती है और मुकाबला दिलचस्प बन जाएगा।

महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर भी इस मुद्दे पर पूरी सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में सबकी नजरें अब उद्धव ठाकरे के फैसले पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि उनका रुख यह तय करेगा कि बारामती में चुनाव निर्विरोध होगा या फिर कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। सुनेत्रा पवार और ठाकरे के बीच हुई बातचीत को भी इसी संदर्भ में अहम माना जा रहा है।

यह उपचुनाव उस सीट पर हो रहा है, जो लंबे समय से पवार परिवार का गढ़ रही है। बारामती सीट Ajit Pawar के निधन के बाद खाली हुई है। अजित पवार इस क्षेत्र से आठ बार विधायक चुने गए थे और क्षेत्र में उनका मजबूत जनाधार था। उनके निधन के बाद राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब सुनेत्रा पवार के कंधों पर है।

सुनेत्रा पवार फिलहाल राज्य की डिप्टी सीएम भी हैं और उन्होंने इस चुनाव के लिए राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। वे 6 अप्रैल को अपना नामांकन दाखिल करने वाली हैं, जो कि नामांकन की अंतिम तिथि भी है। 7 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अप्रैल तक नाम वापस लिए जा सकेंगे।

अगर नामांकन की अंतिम तारीख तक सुनेत्रा पवार के खिलाफ कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरता, तो वे निर्विरोध निर्वाचित घोषित हो सकती हैं। लेकिन यदि कोई अन्य प्रत्याशी सामने आता है, तो 23 अप्रैल को मतदान होगा और 4 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे।

कुल मिलाकर, बारामती उपचुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधनों की दिशा को भी दर्शा सकता है।

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