6 Apr 2026, Mon

फ्लैट खरीदा ₹1.8 करोड़ में, खामियों से परेशान ओनर को अब बिल्डर देगा ₹4 करोड़ मुआवजा, जानें पूरी बात

HRERA का बड़ा फैसला: Chintels Paradiso मामले में होमबायर को 4 करोड़ से अधिक का मुआवजा

हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (Haryana Real Estate Regulatory Authority) ने गुरुग्राम के सेक्टर-109 स्थित Chintels Paradiso प्रोजेक्ट से जुड़े एक मामले में बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। इस फैसले में बिल्डर Chintels India Private Limited को एक होमबायर को 4 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। यह निर्णय लंबे समय से चली आ रही निर्माण खामियों और खरीदारों की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख को दर्शाता है।

यह मामला दिल्ली निवासी अरुणा गर्ग से जुड़ा है, जिन्होंने सेक्टर-109 के टावर-C में 4BHK फ्लैट खरीदा था। उन्होंने लगभग 1.8 करोड़ रुपये का भुगतान किया और अक्टूबर 2019 में फ्लैट का कब्जा प्राप्त किया। हालांकि, कब्जा लेने के तुरंत बाद ही फ्लैट में कई गंभीर खामियां सामने आने लगीं। इनमें टूटी टाइल्स, असमान फर्श, बालकनी में दरारें और कॉमन एरिया में भी संरचनात्मक समस्याएं शामिल थीं।

खरीदार ने कई बार बिल्डर को इन खामियों की जानकारी दी, लेकिन समय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 10 फरवरी 2022 को इसी प्रोजेक्ट के टावर-D का एक हिस्सा अचानक ढह गया। इस दर्दनाक घटना में दो लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए।

जांच में सामने आया कि निर्माण में इस्तेमाल कंक्रीट में क्लोराइड की मात्रा अधिक थी, जिसके कारण स्टील में जंग लग गई और इमारत की संरचना कमजोर हो गई। इस मामले की जांच जिला प्रशासन और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (Indian Institute of Technology Delhi) के विशेषज्ञों ने की।

विशेषज्ञों ने इमारत की स्थिति को बेहद खतरनाक बताया और कहा कि इसकी मरम्मत तकनीकी और आर्थिक रूप से संभव नहीं है। HRERA ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि पूरा प्रोजेक्ट रहने योग्य नहीं है और इसकी पूरी जिम्मेदारी बिल्डर की है। साथ ही, खरीदार को किसी भी तरह से दोषी नहीं ठहराया गया, क्योंकि उन्हें उच्च गुणवत्ता और सुरक्षित निर्माण का भरोसा दिया गया था।

मुआवजे के तहत अथॉरिटी ने सेक्टर-109 में बढ़ी प्रॉपर्टी कीमतों को ध्यान में रखते हुए 13,000 रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से राशि तय की। इसके आधार पर कुल मुआवजा 4.09 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। इसके अलावा इस राशि पर 10.8% सालाना ब्याज भी लागू होगा, जो भुगतान पूरा होने तक जारी रहेगा।

इसके साथ ही बिल्डर को 4.6 लाख रुपये स्टांप ड्यूटी, 2 लाख रुपये मानसिक उत्पीड़न के लिए और 50,000 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में भी चुकाने का आदेश दिया गया है। हालांकि, किराया, ईएमआई और अन्य अतिरिक्त दावों को HRERA ने खारिज कर दिया।

यह फैसला रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बड़ा संदेश है कि बिल्डरों को निर्माण की गुणवत्ता और खरीदारों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। यह निर्णय भविष्य में होमबायर्स के अधिकारों की सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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