पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच मिडिल-ईस्ट संकट पर सार्थक बातचीत, वैश्विक शांति पर जोर
नई दिल्ली/वाशिंगटन: मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध के बीच भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump के बीच एक महत्वपूर्ण और सार्थक बातचीत हुई है। यह जानकारी व्हाइट हाउस की ओर से शुक्रवार को दी गई। इससे पहले दोनों नेताओं के बीच मंगलवार को फोन पर लंबी चर्चा हुई थी, जिसमें क्षेत्रीय शांति और वैश्विक स्थिरता पर विशेष रूप से जोर दिया गया।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव Karoline Leavitt ने इस बातचीत को “सार्थक” बताया और कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच मजबूत और सकारात्मक संबंध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों नेताओं के बीच हालिया बातचीत काफी उपयोगी रही, जिसमें मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष और उससे उत्पन्न वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा की गई।
फोन कॉल के दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार साझा किए। विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा पर चर्चा हुई, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इस मार्ग से वैश्विक तेल और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, और किसी भी प्रकार की बाधा पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बातचीत के बारे में अपने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि भारत हमेशा से क्षेत्र में शांति और स्थिरता का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट “खुला, सुरक्षित और सुलभ” रहना चाहिए ताकि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रह सके।
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका दोनों ही इस बात पर सहमत हैं कि क्षेत्र में तनाव को कम करना और जल्द से जल्द शांति बहाल करना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देशों के बीच आगे भी संपर्क बनाए रखने पर सहमति बनी है, ताकि हालात को बेहतर तरीके से संभाला जा सके।
सूत्रों के अनुसार, इस बातचीत में यह भी चर्चा हुई कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव का असर ऊर्जा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ रहा है। मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
हालांकि, इस बातचीत के दौरान किसी ठोस समझौते की घोषणा नहीं की गई, लेकिन इसे दोनों देशों के बीच मजबूत कूटनीतिक संबंधों का संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका जैसे प्रमुख देशों के बीच इस तरह की बातचीत वैश्विक शांति के प्रयासों को गति दे सकती है।
इस बीच, मिडिल-ईस्ट में संघर्ष अभी भी जारी है और हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। ऐसे में पीएम मोदी और ट्रंप के बीच हुई यह बातचीत वैश्विक स्तर पर शांति स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
फिलहाल, दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में क्या इस बातचीत का कोई सकारात्मक असर देखने को मिलेगा और क्या मिडिल-ईस्ट में शांति बहाल हो पाएगी।

