पाकिस्तान में पेट्रोल के दाम में बड़ी कटौती, डीजल अभी भी महंगा; जनता को मिली आंशिक राहत
Pakistan में आम जनता को महंगाई के बीच बड़ी राहत मिली है। सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में 80 रुपये प्रति लीटर की कटौती करने का फैसला किया है। शहबाज शरीफ सरकार के इस फैसले के बाद पेट्रोल अब 378 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध होगा। यह नई कीमतें शनिवार रात 12 बजे से लागू कर दी गई हैं।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देश में ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। हाल के दिनों में पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमतों में क्रमशः 43% और 55% तक की बढ़ोतरी हुई थी, जिससे आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई थीं। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और आपूर्ति को लेकर चिंताएं भी देखी जा रही थीं।
सरकार ने यह फैसला राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif द्वारा घोषित किया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य आम जनता को राहत देना है, खासकर उस समय जब क्षेत्र में जारी संघर्ष और आर्थिक दबाव के कारण हालात और चुनौतीपूर्ण हो गए हैं।
ईंधन संकट और क्षेत्रीय परिस्थितियों के चलते पाकिस्तान की सरकार ने पहले कई सख्त कदम भी उठाए थे। इनमें वर्क फ्रॉम होम और चार दिन के कार्य सप्ताह जैसे उपाय शामिल थे, ताकि लोग कम यात्रा करें और ईंधन की खपत को नियंत्रित किया जा सके। हालांकि इन उपायों के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी रही, जिससे जनता में असंतोष बढ़ता गया।
नई दरों के अनुसार, पेट्रोल की कीमतों में राहत दी गई है, लेकिन डीजल अभी भी महंगा बना हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाई-स्पीड डीजल की कीमत 520.35 रुपये प्रति लीटर के आसपास बनी हुई है। डीजल की ऊंची कीमतें परिवहन और माल ढुलाई पर सीधा असर डालती हैं, जिससे महंगाई और बढ़ने का खतरा रहता है।
सरकार ने पेट्रोल पर लगने वाली लेवी को बढ़ाकर 160 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल पर टैक्स को घटाकर शून्य कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह संतुलन बनाए रखने के लिए किया गया है, ताकि पेट्रोल की कीमतों में राहत दी जा सके और डीजल के कारण बढ़ने वाली लॉजिस्टिक लागत को नियंत्रित किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से आम जनता को कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन डीजल की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई पर पूरी तरह नियंत्रण पाना अभी भी चुनौती बना रहेगा।
कुल मिलाकर, पाकिस्तान सरकार का यह फैसला जनता को राहत देने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है, लेकिन देश की आर्थिक स्थिति और वैश्विक ऊर्जा संकट के चलते आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

