अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, ‘सम्मान में 20 तेल टैंकर भेजे’
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच Donald Trump ने एक बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। ट्रंप के अनुसार, ईरान ने “सम्मान के संकेत” के रूप में अमेरिका को तेल से लदे 20 बड़े जहाज भेजे हैं, जो Strait of Hormuz से होकर गुजर रहे हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हैं और वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ रही है।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि वह इस कदम को पूरी तरह परिभाषित नहीं कर सकते, लेकिन इसे एक सकारात्मक संकेत मानते हैं। उन्होंने बताया कि पहले ईरान 10 जहाज भेजने पर सहमत हुआ था, लेकिन बाद में इस संख्या को बढ़ाकर 20 कर दिया गया। ट्रंप ने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और आने वाले कुछ दिनों तक जारी रहेगी।
गौरतलब है कि हाल ही में Iran ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान केवल उन्हीं देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दे रहा है जिन्हें वह “मित्र राष्ट्र” मानता है। ऐसे में अमेरिका को तेल टैंकर भेजे जाने का दावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर रहा है।
इस बीच, ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान के साथ दोहरी रणनीति अपना रहा है—एक तरफ बातचीत जारी है, तो दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई भी चल रही है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी बलों ने ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया है, जिससे उसकी नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
ट्रंप का यह बयान उस समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है। United States और उसके सहयोगी देशों की गतिविधियों पर ईरान लगातार नजर बनाए हुए है। दूसरी ओर, Israel के साथ अमेरिका के संबंध और मजबूत होते दिख रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय समीकरण और जटिल हो गए हैं।
इसके अलावा, ट्रंप ने एक बार फिर 2015 के परमाणु समझौते की आलोचना की, जिसे Barack Obama के कार्यकाल में लागू किया गया था। ट्रंप ने इसे “अमेरिकी इतिहास का सबसे खराब समझौता” बताते हुए कहा कि अगर यह समझौता जारी रहता, तो आज ईरान के पास परमाणु हथियार हो सकते थे। उन्होंने संकेत दिया कि वह एक नया और सख्त समझौता चाहते हैं, जो ईरान की परमाणु गतिविधियों और सैन्य क्षमताओं पर पूरी तरह नियंत्रण रखे।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह दावा कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकता है। हालांकि, अगर यह सच साबित होता है, तो यह दोनों देशों के रिश्तों में संभावित नरमी का संकेत भी हो सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस घटनाक्रम पर टिकी हैं और आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

