27 Mar 2026, Fri

ट्रंप ने किया अपमानित, अब रूबियो G7 विदेश मंत्रियों को ईरान जंग के लिए मनाने की कर रहे कोशिश

ईरान तनाव के बीच G7 बैठक: मार्को रूबियो का सख्त संदेश, ईरान की धमकियों के खिलाफ एकजुट होने की अपील

ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने फ्रांस में आयोजित G7 (ग्रुप ऑफ सेवन) देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की और स्पष्ट संदेश दिया कि अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने वाले देशों को ईरान की धमकियों के खिलाफ एकजुट होकर सामने आना चाहिए।

फ्रांस में हुई G7 बैठक

यह महत्वपूर्ण बैठक फ्रांस के वॉक्स-डी-सर्ने में आयोजित की गई, जहां G7 देशों—अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान—के विदेश मंत्री मौजूद थे।

बैठक ऐसे समय में हुई है जब ईरान से जुड़ा तनाव बढ़ता जा रहा है और वैश्विक कूटनीति पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि, बैठक के बाद किसी भी मंत्री की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।

ट्रंप का NATO पर हमला

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने NATO देशों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि NATO देश अमेरिका पर सुरक्षा के लिए निर्भर हैं, लेकिन जब ईरान और इजरायल के बीच तनाव में सहयोग की बात आई तो वे पीछे हट गए।

ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि NATO देश होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सुरक्षित करने में अमेरिका का साथ नहीं दे रहे, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है और कीमतें बढ़ रही हैं।

ईरान नीति पर अमेरिका का दबाव

मार्को रूबियो के सामने अब चुनौती है कि वे G7 देशों को अमेरिका की ईरान नीति के पक्ष में एकजुट करें।

हालांकि, G7 के कई देश इस मुद्दे पर असमंजस में हैं और खुलकर समर्थन देने से बच रहे हैं। यूरोप और एशिया के कई देश कूटनीति और बातचीत के जरिए समाधान की वकालत कर रहे हैं।

रूबियो का सख्त बयान

फ्रांस रवाना होने से पहले मार्को रूबियो ने कहा, “मैं किसी को खुश करने के लिए वहां नहीं जा रहा हूं। मैं अमेरिका के लोगों के लिए काम करता हूं।”

उन्होंने आगे कहा कि दुनिया को उन नेताओं का आभारी होना चाहिए जो इस तरह के वैश्विक खतरों का सामना करने के लिए तैयार हैं। उनके इस बयान से यह साफ हो गया कि अमेरिका अपने रुख को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं करने वाला है।

G7 देशों की चिंताएं

बैठक के दौरान कई देशों ने अपनी चिंताएं भी जाहिर कीं।

फ्रांस के रक्षा प्रमुख जनरल Fabien Mandon ने कहा कि अमेरिका ने उन्हें संभावित सैन्य कार्रवाई की कोई जानकारी नहीं दी, जिससे सहयोग पर सवाल उठते हैं।

जर्मनी के विदेश मंत्री Johann Wadephul ने यूक्रेन को समर्थन जारी रखने और मध्य पूर्व में स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया।

ब्रिटेन की विदेश सचिव Yvette Cooper ने कहा कि ईरान पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक नहीं बना सकता और समाधान के लिए कूटनीति ही सबसे बेहतर रास्ता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर चिंता

G7 देशों ने खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अगर यहां तनाव बढ़ता है तो इसका सीधा असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और तेल कीमतों पर पड़ सकता है।

आगे की राह

मार्को रूबियो की यह पहल वैश्विक कूटनीति में एक अहम मोड़ मानी जा रही है। हालांकि, G7 देशों के बीच एकमत न होना इस मुद्दे को और जटिल बना सकता है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के मुद्दे पर किस तरह की रणनीति अपनाते हैं और क्या वे किसी साझा समाधान तक पहुंच पाते हैं।

निष्कर्ष

ईरान को लेकर बढ़ता तनाव न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन चुका है। G7 बैठक और अमेरिकी विदेश मंत्री का सख्त रुख इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल सकती है।

फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दुनिया के बड़े देश मिलकर इस संकट का कोई शांतिपूर्ण समाधान निकाल पाएंगे या यह तनाव और बढ़ेगा।

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