3 Apr 2026, Fri

झारखंड में बढ़ रहे हाथियों के हमले, तीन लोगों की मौत, एक महुआ बीनने गया था

झारखंड में हाथियों का आतंक: रामगढ़ में अलग-अलग हमलों में तीन लोगों की मौत, इलाके में दहशत

झारखंड में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। ताजा मामला Ramgarh जिले से सामने आया है, जहां शुक्रवार सुबह हाथियों के झुंड ने अलग-अलग जगहों पर हमला कर तीन लोगों की जान ले ली, जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। इन घटनाओं के बाद पूरे इलाके में भय और चिंता का माहौल बन गया है।

दो अलग-अलग घटनाओं में तीन की मौत

पहली घटना गोला क्षेत्र के मुरपा गांव में हुई, जहां 65 वर्षीय शामदेव साव महुआ बीनने के लिए जंगल गए थे। इसी दौरान जंगली हाथियों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

दूसरी घटना बंदा गांव में सामने आई, जहां ईंट भट्ठे पर सो रहे दो मजदूरों—धीरज भुईया और युगल भुईया—पर हाथियों ने अचानक हमला कर दिया। दोनों मजदूरों की उम्र लगभग 20 से 30 वर्ष के बीच बताई जा रही है। इस हमले में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं एक अन्य बुजुर्ग व्यक्ति भी इस हमले में गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उसका इलाज जारी है।

वन विभाग और प्रशासन की कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को तत्काल 25,000 रुपये की राहत राशि दी गई है। वहीं, झारखंड सरकार की नीति के अनुसार हाथी के हमले में मौत होने पर कुल 4 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है, जिसमें शेष 3.75 लाख रुपये की राशि आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दी जाएगी।

पुलिस और अधिकारियों का बयान

गोला थाना प्रभारी अभिषेक कुमार ने बताया कि “दो अलग-अलग स्थानों पर हाथियों के हमले में तीन लोगों की मौत हुई है। सभी शव बरामद कर लिए गए हैं और आगे की प्रक्रिया जारी है।” वहीं, वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इलाके में हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

स्थानीय लोगों में दहशत

घटना के बाद ग्रामीणों में भारी दहशत है। बंदा गांव के मुखिया कुलदीप साव ने बताया कि इस तरह की घटनाएं अब आम होती जा रही हैं, जिससे लोगों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि हाथियों के आतंक से बचाव के लिए ठोस और स्थायी उपाय किए जाएं।

बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष

विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के लगातार कटाव और मानव बस्तियों के विस्तार के कारण हाथियों और इंसानों के बीच टकराव बढ़ रहा है। भोजन और पानी की तलाश में हाथी अब गांवों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे ऐसी घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।

निष्कर्ष

रामगढ़ की यह घटना एक बार फिर इस बात की चेतावनी है कि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है। जब तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक ऐसे हादसों को रोक पाना मुश्किल होगा।

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