27 Feb 2026, Fri

देश में पहली बार! NHAI ने हाईवे पर बनाई लाल पट्टियों वाली अनोखी सड़क, जानिए क्या होगा इससे फायदा?

मध्य प्रदेश: राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने जबलपुर-भोपाल हाईवे (NH-45) पर देश में पहली बार एक अनोखी सड़क सुरक्षा तकनीक का परीक्षण शुरू किया है। हाईवे के बीचों-बीच चमकदार लाल पट्टियां बिछाकर ड्राइवरों को सतर्क करने का यह प्रयोग, दोनों—मनुष्यों और वन्यजीवों—की सुरक्षा के लिए किया गया है।

लाल पट्टियों की वजह से ड्राइवर होंगे चौकन्ने

जबलपुर-भोपाल हाईवे का एक बड़ा हिस्सा वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के घने जंगलों से होकर गुजरता है। इस हाई-रिस्क कॉरिडोर में अक्सर वन्यजीव तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आ जाते थे। इस समस्या को हल करने के लिए NHAI ने ब्राइट रेड टेबल-टॉप मार्किंग तकनीक का इस्तेमाल किया है। यह तकनीक सिर्फ रंग का खेल नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से ड्राइवरों की चेतना को बढ़ाती है।

जैसे ही वाहन इन लाल पट्टियों के ऊपर से गुजरता है, टायर और सड़क के बीच घर्षण से गाड़ी में कंपन और आवाज पैदा होती है। इससे ड्राइवर का ध्यान तुरंत सड़क पर केंद्रित हो जाता है और वह बिना देर किए ब्रेक लगाता है। साथ ही लाल रंग को मनोवैज्ञानिक रूप से खतरे का संकेत माना जाता है, जो दूर से ही चेतावनी देता है कि वाहन एक संवेदनशील इलाके में प्रवेश कर रहा है।

रात के समय सुरक्षा में बढ़ोतरी

रात के समय हाईवे पर सबसे अधिक सड़क हादसे होते हैं, क्योंकि विजिबिलिटी कम होती है और वन्यजीव अचानक सड़क पार कर लेते हैं। इन लाल टेबल-टॉप मार्किंग्स की सतह हेडलाइट की रोशनी में चमकती है, जिससे ड्राइवरों को एनिमल क्रॉसिंग जोन का पता पहले ही लग जाता है। इससे वाहन धीरे चलते हैं और जंगली जानवर सुरक्षित तरीके से सड़क पार कर पाते हैं।

मानव और वन्यजीव दोनों को फायदा

इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे वन्यजीवों और इंसानों दोनों की जान बचाई जा सकती है। बाघ, तेंदुआ, हिरण जैसे दुर्लभ जीव सुरक्षित रहेंगे और सड़क पर अचानक जानवर आने से होने वाले हादसों में मनुष्यों की जान भी सुरक्षित रहेगी। NHAI की यह तकनीक इको-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में एक बड़ा कदम है।

वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व

विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रयोग न केवल सड़क सुरक्षा के लिए अहम है, बल्कि इसे अन्य हाईवे और वन्यजीव कॉरिडोर पर भी लागू किया जा सकता है। इससे न केवल दुर्घटनाओं की संख्या घटेगी, बल्कि जनता में सड़क पर सुरक्षित ड्राइविंग की जागरूकता भी बढ़ेगी।

इस तरह के अभिनव कदम देश के सड़क सुरक्षा ढांचे को मजबूत कर रहे हैं। जबलपुर-भोपाल हाईवे का यह प्रयोग एक मिसाल बन सकता है, जो भविष्य में पूरे देश के हाईवे नेटवर्क पर लागू किया जा सके।

जबलपुर-भोपाल हाईवे पर NHAI का अनोखा प्रयोग: लाल पट्टियों से ड्राइवर और वन्यजीव सुरक्षित

मध्य प्रदेश: राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने जबलपुर-भोपाल हाईवे (NH-45) पर देश में पहली बार एक अनोखी सड़क सुरक्षा तकनीक का परीक्षण शुरू किया है। हाईवे के बीचों-बीच चमकदार लाल पट्टियां बिछाकर ड्राइवरों को सतर्क करने का यह प्रयोग, दोनों—मनुष्यों और वन्यजीवों—की सुरक्षा के लिए किया गया है।

लाल पट्टियों की वजह से ड्राइवर होंगे चौकन्ने

जबलपुर-भोपाल हाईवे का एक बड़ा हिस्सा वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के घने जंगलों से होकर गुजरता है। इस हाई-रिस्क कॉरिडोर में अक्सर वन्यजीव तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आ जाते थे। इस समस्या को हल करने के लिए NHAI ने ब्राइट रेड टेबल-टॉप मार्किंग तकनीक का इस्तेमाल किया है। यह तकनीक सिर्फ रंग का खेल नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक तरीके से ड्राइवरों की चेतना को बढ़ाती है।

जैसे ही वाहन इन लाल पट्टियों के ऊपर से गुजरता है, टायर और सड़क के बीच घर्षण से गाड़ी में कंपन और आवाज पैदा होती है। इससे ड्राइवर का ध्यान तुरंत सड़क पर केंद्रित हो जाता है और वह बिना देर किए ब्रेक लगाता है। साथ ही लाल रंग को मनोवैज्ञानिक रूप से खतरे का संकेत माना जाता है, जो दूर से ही चेतावनी देता है कि वाहन एक संवेदनशील इलाके में प्रवेश कर रहा है।

रात के समय सुरक्षा में बढ़ोतरी

रात के समय हाईवे पर सबसे अधिक सड़क हादसे होते हैं, क्योंकि विजिबिलिटी कम होती है और वन्यजीव अचानक सड़क पार कर लेते हैं। इन लाल टेबल-टॉप मार्किंग्स की सतह हेडलाइट की रोशनी में चमकती है, जिससे ड्राइवरों को एनिमल क्रॉसिंग जोन का पता पहले ही लग जाता है। इससे वाहन धीरे चलते हैं और जंगली जानवर सुरक्षित तरीके से सड़क पार कर पाते हैं।

मानव और वन्यजीव दोनों को फायदा

इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे वन्यजीवों और इंसानों दोनों की जान बचाई जा सकती है। बाघ, तेंदुआ, हिरण जैसे दुर्लभ जीव सुरक्षित रहेंगे और सड़क पर अचानक जानवर आने से होने वाले हादसों में मनुष्यों की जान भी सुरक्षित रहेगी। NHAI की यह तकनीक इको-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में एक बड़ा कदम है।

वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व

विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रयोग न केवल सड़क सुरक्षा के लिए अहम है, बल्कि इसे अन्य हाईवे और वन्यजीव कॉरिडोर पर भी लागू किया जा सकता है। इससे न केवल दुर्घटनाओं की संख्या घटेगी, बल्कि जनता में सड़क पर सुरक्षित ड्राइविंग की जागरूकता भी बढ़ेगी।

इस तरह के अभिनव कदम देश के सड़क सुरक्षा ढांचे को मजबूत कर रहे हैं। जबलपुर-भोपाल हाईवे का यह प्रयोग एक मिसाल बन सकता है, जो भविष्य में पूरे देश के हाईवे नेटवर्क पर लागू किया जा सके।

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