नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई जनवरी 2026 तक के लिए टाल दी है। चैतन्य बघेल को ईडी (Enforcement Directorate) ने 18 जुलाई 2025 को छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया था। वह फिलहाल जेल में हैं और इस मामले में कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है।
🔹 सुप्रीम कोर्ट का फैसला
चैतन्य बघेल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी धाराओं को चुनौती दी थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने मामले को टुकड़ों में सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अब सुनवाई जनवरी के पहले सप्ताह में होगी।
🔹 हाईकोर्ट के फैसले का विरोध
इससे पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी को सही ठहराया था। चैतन्य बघेल ने हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट में उनकी जमानत याचिका पर बहस पूरी हो चुकी है और फैसला सुरक्षित रखा गया है।
🔹 शराब घोटाले की जानकारी
शराब घोटाला मुख्य रूप से 2019-2023 के दौरान हुआ, जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार सत्ता में थी। इस घोटाले में अवैध देशी और विदेशी शराब बिक्री, फर्जी होलोग्राम, ओवर रेटिंग, और राजनीतिक-अधिकारी मिलीभगत के आरोप शामिल हैं। ईडी ने अब तक कई गिरफ्तारियां की हैं और कई संपत्तियां कुर्क की गई हैं।
ईडी का दावा है कि इस घोटाले से राज्य खजाने को भारी नुकसान हुआ और लगभग 2,500 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध आय लाभार्थियों तक पहुंची। चैतन्य बघेल जुलाई 2025 से जेल में हैं और फिलहाल उनके खिलाफ चल रही जांच जारी है।
🔹 आगे की प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई जनवरी में होगी, जिसमें याचिका पर विस्तृत बहस होगी। यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत की इस सुनवाई के बाद ही तय होगा कि चैतन्य बघेल को जमानत मिलती है या नहीं।
🔹 राजनीतिक और कानूनी महत्व
यह मामला केवल मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार और ईडी के बीच चल रही जांच ने इस मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस केस से राज्य और राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर पड़ सकता है।

