4 Apr 2026, Sat

क्या है 1998 का वह मामला, जिसमें कांग्रेस विधायक को 3 साल की जेल, विधायकी गई, अब वापस कैसे मिलेगी? क्या है नियम?

MP Politics: कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म, जानें पूरा मामला और आगे के विकल्प

मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां दतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक Rajendra Bharti की विधायकी समाप्त हो गई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा उन्हें तीन साल की सजा सुनाए जाने के बाद यह कार्रवाई स्वतः लागू हो गई। अब राज्य में इस सीट पर उपचुनाव की तैयारी शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला बैंक से अनुचित तरीके से ब्याज लेने से जुड़ा है, जिसकी शुरुआत साल 1998 में हुई थी। जानकारी के मुताबिक, राजेंद्र भारती की मां सावित्री ने जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक में 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) करवाई थी। इस एफडी पर 13.5% सालाना ब्याज तय किया गया था।

एफडी की अवधि पूरी होने के बाद पैसा निकालने की बजाय, आरोप है कि दस्तावेजों में हेरफेर कर कई सालों तक ब्याज निकाला जाता रहा। रिपोर्ट के अनुसार, 1999 से 2011 तक हर साल करीब 1.35 लाख रुपये निकाले गए, जिससे कुल मिलाकर लगभग 18.5 लाख रुपये का अवैध लाभ लिया गया।

इस मामले में कोर्ट ने Rajendra Bharti को तीन साल की सजा और एक लाख रुपये का जुर्माना सुनाया। सह-आरोपी रघुबीर शरण को एक साल की सजा दी गई, जबकि उनकी मां का पहले ही निधन हो चुका है।

क्यों गई विधायकी?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 191(1)(e) और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 के अनुसार, यदि किसी विधायक को दो साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। चूंकि राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा मिली है, इसलिए उनकी विधानसभा सदस्यता तुरंत खत्म कर दी गई।

मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने उनकी सीट को रिक्त घोषित कर दिया है और इस संबंध में चुनाव आयोग को भी सूचित कर दिया गया है। अब दतिया सीट पर उपचुनाव होना तय माना जा रहा है।

क्या वापस मिल सकती है विधायकी?

हालांकि, Rajendra Bharti के पास अपनी सदस्यता वापस पाने का कानूनी विकल्प अभी भी मौजूद है। इसके लिए उन्हें उच्च न्यायालय में निचली अदालत के फैसले को चुनौती देनी होगी।

अगर हाईकोर्ट उनके खिलाफ दिए गए फैसले पर “स्टे” (स्थगन) दे देता है—खासकर दोष सिद्धि (conviction) पर—तो उनकी विधायकी बहाल हो सकती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि केवल सजा पर स्टे मिलने से सदस्यता वापस नहीं आती, बल्कि दोष सिद्धि पर भी रोक जरूरी होती है।

कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें 60 दिनों के भीतर यह राहत हासिल करनी होगी, वरना उनकी सदस्यता स्थायी रूप से समाप्त मानी जाएगी।

कांग्रेस की तैयारी

कांग्रेस पार्टी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कानूनी लड़ाई की तैयारी में जुट गई है। सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ वकील और नेता Kapil Sibal और Vivek Tankha इस मामले में हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं।

राजनीतिक सफर

राजेंद्र भारती का राजनीतिक करियर लंबा रहा है। वह 1985 में पहली बार विधायक बने थे और अब तक तीन बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। हाल ही में 2023 के चुनाव में उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता Narottam Mishra को हराकर सुर्खियां बटोरी थीं।

निष्कर्ष

राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने से मध्य प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। अब सबकी नजर हाईकोर्ट के फैसले और संभावित उपचुनाव पर टिकी है, जो राज्य की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *