पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत-ईरान के विदेश मंत्रियों की अहम बातचीत, क्षेत्रीय हालात और BRICS मुद्दों पर चर्चा
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक संपर्क लगातार बना हुआ है। इसी क्रम में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi के बीच एक अहम बातचीत हुई है। दोनों नेताओं के बीच यह चर्चा ऐसे समय हुई है जब पूरे पश्चिम एशिया में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर कई तरह की चिंताएं सामने आ रही हैं।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बातचीत की जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने ईरानी विदेश मंत्री से फोन पर चर्चा की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच भारत-ईरान के द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ बहुपक्षीय मंच BRICS से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच हुई चर्चा
दोनों विदेश मंत्रियों के बीच यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। क्षेत्र में हाल के दिनों में बढ़े सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।
जानकारी के मुताबिक फरवरी 2026 के अंत से शुरू हुए इस संघर्ष में कई देशों की भूमिका सामने आई है, जिसके कारण क्षेत्रीय स्थिरता पर खतरा पैदा हो गया है। इस दौरान ईरान और अन्य देशों के बीच तनाव बढ़ने से समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट का सबसे बड़ा असर समुद्री व्यापार मार्गों पर पड़ सकता है। खास तौर पर Strait of Hormuz को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है।
अगर इस मार्ग पर किसी तरह का संकट पैदा होता है तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील मानी जाती है।
पहले भी हो चुकी हैं कई बातचीत
बताया जा रहा है कि एस. जयशंकर और अब्बास अराघची के बीच हाल के दिनों में यह चौथी बड़ी बातचीत है। इससे पहले 28 फरवरी, 5 मार्च और 10 मार्च को भी दोनों नेताओं के बीच फोन पर चर्चा हो चुकी है।
इन बातचीतों में मुख्य रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और भारतीय जहाजों तथा तेल टैंकरों के सुरक्षित आवागमन जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई थी। ईरान की ओर से इन वार्ताओं में क्षेत्रीय घटनाओं पर अपनी स्थिति भी स्पष्ट की गई और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समर्थन की अपील की गई।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा असर
पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और शिपिंग मार्गों पर जोखिम बढ़ने से व्यापार भी प्रभावित हो रहा है।
भारत इस पूरे मामले में संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाते हुए सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। भारत के ईरान के साथ ऊर्जा, व्यापार और कनेक्टिविटी से जुड़े कई अहम हित हैं।
भारत-ईरान संबंधों में लगातार संपर्क
भारत और ईरान के संबंध लंबे समय से रणनीतिक और आर्थिक सहयोग पर आधारित रहे हैं। खास तौर पर Chabahar Port जैसे प्रोजेक्ट दोनों देशों के बीच सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।
ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है, भारत और ईरान के बीच उच्च स्तर पर संवाद जारी रहना क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच और भी कूटनीतिक बातचीत देखने को मिल सकती है।

