18 Feb 2026, Wed

उत्तराखंड: चार धाम यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में हुआ बदलाव, अब श्रद्धालुओं को देनी होगी फीस

चार धाम यात्रा रजिस्ट्रेशन होगा अब सशुल्क, फर्जी बुकिंग रोकने के लिए सरकार का बड़ा कदम

देहरादून: Uttarakhand में हर साल लाखों श्रद्धालु पवित्र Char Dham Yatra के लिए रजिस्ट्रेशन कराते हैं। अब इस प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन को सशुल्क करने का फैसला लिया है।

ऑनलाइन पंजीकरण के लिए शुल्क तय करने के उद्देश्य से गढ़वाल डिवीजन के एडिशनल कमिश्नर की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई है। कमेटी जल्द अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी, जिसके बाद अंतिम शुल्क तय किया जाएगा।

कम से कम 10 रुपये शुल्क का सुझाव

गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने जानकारी देते हुए कहा कि चार धाम यात्रा के लिए फर्जी रजिस्ट्रेशन की समस्या सामने आ रही थी। इसे रोकने के लिए कम से कम 10 रुपये का शुल्क लिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि नाममात्र की फीस से अनावश्यक और फर्जी बुकिंग पर लगाम लगेगी, जिससे वास्तविक श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सकेगी।

कमेटी की सिफारिशों और राज्य सरकार की मंजूरी के बाद अंतिम शुल्क संरचना लागू की जाएगी।

देवभूमि की पहचान है चार धाम

उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से जाना जाता है। यहां सालभर देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। लेकिन सबसे अधिक भीड़ चार धाम यात्रा के दौरान देखने को मिलती है। यह यात्रा हिमालय की ऊंचाइयों में बसे चार पवित्र धामों— Yamunotri Temple, Gangotri Temple, Kedarnath Temple और Badrinath Temple —को समाहित करती है।

ये चारों मंदिर समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर स्थित हैं और हर वर्ष लगभग छह महीने के लिए ही खुलते हैं। आमतौर पर कपाट अप्रैल या मई में खोले जाते हैं और अक्टूबर या नवंबर की शुरुआत में सर्दियों के कारण बंद कर दिए जाते हैं।

यात्रा का पारंपरिक क्रम

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चार धाम यात्रा घड़ी की सुई की दिशा में पूरी करनी चाहिए। इसलिए यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री से होती है, इसके बाद गंगोत्री, फिर केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ में यात्रा पूर्ण होती है।

यात्रा सड़क मार्ग से की जा सकती है। इसके अलावा हेलीकॉप्टर सेवाएं भी उपलब्ध रहती हैं, जिससे बुजुर्ग और अस्वस्थ श्रद्धालुओं को सुविधा मिलती है।

दो धाम यात्रा भी लोकप्रिय

कई श्रद्धालु दो धाम यात्रा के तहत केवल केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन भी करते हैं। केदारनाथ भगवान शिव को समर्पित है, जबकि बद्रीनाथ भगवान विष्णु के पवित्र धाम के रूप में प्रसिद्ध है।

चार धाम यात्रा जितनी दिव्य और आध्यात्मिक मानी जाती है, उतनी ही कठिन भी है। ऊंचाई, मौसम और दुर्गम रास्तों के कारण यात्रियों को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार रहना पड़ता है। बावजूद इसके, यह यात्रा आत्मिक शांति और श्रद्धा का अद्वितीय अनुभव प्रदान करती है।

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