23 Mar 2026, Mon

ईरान युद्ध के चलते LPG संकट गहराने की आशंका, 14.2 Kg के सिलेंडर में 10 किलो गैस देने पर हो रहा विचार!

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े संकट का असर अब भारत की रसोई तक पहुंचता दिख रहा है। एलपीजी सप्लाई पर बढ़ते दबाव के बीच ऑयल मार्केटिंग कंपनियां एक बड़ा और असाधारण कदम उठाने की तैयारी में हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले दिनों में घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने वाले 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर में सिर्फ 10 किलोग्राम गैस ही भरी जा सकती है।

इस संभावित फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह खाड़ी देशों से एलपीजी की आपूर्ति में आई भारी बाधा है। Strait of Hormuz में जारी गतिरोध के कारण एलपीजी से भरे जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले सप्ताह केवल दो जहाज ही भारत पहुंच सके, जो देश की महज एक दिन की जरूरत के बराबर सप्लाई लेकर आए थे।

ऑयल कंपनियों का मानना है कि अगर मौजूदा स्थिति बनी रहती है, तो देश में एलपीजी भंडार तेजी से घट सकता है। ऐसे में उपलब्ध स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए सिलेंडर में गैस की मात्रा कम करना एक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। अधिकारियों के अनुसार, जहां 14.2 किलो का सिलेंडर एक परिवार के लिए 35 से 40 दिन तक चलता है, वहीं 10 किलो गैस भी लगभग एक महीने तक जरूरत पूरी कर सकती है।

अगर इस योजना को लागू किया जाता है, तो सिलेंडरों पर नए स्टिकर लगाए जाएंगे, जिनमें गैस की कम मात्रा की स्पष्ट जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही उपभोक्ताओं को कीमत में भी आनुपातिक राहत दी जा सकती है। हालांकि, इस बदलाव के लिए बॉटलिंग प्लांट्स में तकनीकी संशोधन और नियामकीय मंजूरी जरूरी होगी, जिसमें कुछ समय लग सकता है।

एलपीजी की उपलब्धता पहले से ही दबाव में है। भारत अपनी कुल जरूरत का करीब 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है और इसमें से लगभग 90 प्रतिशत सप्लाई खाड़ी देशों से आती रही है। मौजूदा संकट के चलते यह सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। फिलहाल भारत के छह एलपीजी टैंकर पर्शियन गल्फ में फंसे हुए हैं और जलडमरूमध्य पार करने का इंतजार कर रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

इस बीच पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने भी गैस संरक्षण की जरूरत पर जोर दिया है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि फिलहाल उपभोक्ताओं को नियमित सप्लाई दी जा रही है। पहले जहां कमर्शियल सेक्टर को गैस सप्लाई सीमित कर दी गई थी, वहीं अब उसे आंशिक रूप से बहाल किया गया है, जिससे दबाव और बढ़ गया है।

देश में रोजाना करीब 93,500 टन एलपीजी की खपत होती है, जिसमें से 86 प्रतिशत घरेलू उपयोग में आता है। मार्च के पहले पखवाड़े में खपत में 17 प्रतिशत की गिरावट भी दर्ज की गई है, जो इस संकट के असर को दर्शाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है, तो आने वाले समय में एलपीजी की उपलब्धता और कीमतों दोनों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और कंपनियों के लिए संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।

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