संगीत पर दिया गया बयान है, जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। सोनू निगम ने हाल ही में कहा कि किसी गीत में सिर्फ “अल्लाह” या “मौला” जैसे शब्द जोड़ देने से वह सूफी संगीत नहीं बन जाता। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो धड़ों में बंट गए हैं—एक पक्ष उनके समर्थन में खड़ा है, तो दूसरा उन्हें जमकर ट्रोल कर रहा है।
करीब तीन दशक लंबे करियर में 783 से अधिक फिल्मों के लिए गाने गा चुके सोनू निगम न केवल अपनी मधुर आवाज के लिए जाने जाते हैं, बल्कि बेबाक राय रखने के लिए भी पहचाने जाते हैं। हाल ही में उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह सूफी संगीत की अवधारणा पर अपनी बात रखते नजर आ रहे हैं।
वीडियो में सोनू निगम कहते हैं कि “सूफी कोई म्यूजिक नहीं बल्कि एक थॉट या फिलॉसफी है।” उन्होंने यह भी कहा कि 2000 के बाद ‘सूफी म्यूजिक’ शब्द का चलन ज्यादा बढ़ा है और इससे पहले इसे इस तरह से परिभाषित नहीं किया जाता था। सोनू निगम के मुताबिक, किसी गीत में धार्मिक शब्दों का इस्तेमाल कर देना ही उसे सूफी संगीत नहीं बना देता। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
कई यूजर्स ने सोनू निगम का समर्थन करते हुए कहा कि वह संगीत के क्षेत्र के दिग्गज हैं और उनकी बात को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। एक यूजर ने लिखा कि सोनू निगम बचपन से ही संगीत साधना कर रहे हैं, इसलिए उनका नजरिया अनुभव पर आधारित है। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि सूफी संगीत की मौजूदा परिभाषा बॉलीवुड द्वारा गढ़ी गई है।
दूसरी ओर, कई यूजर्स ने सोनू निगम के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि अगर सूफी संगीत नहीं होता, तो अमीर खुसरो की कव्वालियों को किस श्रेणी में रखा जाएगा। वहीं कुछ ने उन्हें संगीत और दर्शन की समझ पर ही सवाल खड़े कर दिए।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब सोनू निगम किसी धार्मिक या सांस्कृतिक मुद्दे पर दिए गए बयान को लेकर विवादों में आए हों। इससे पहले साल 2017 में उन्होंने लाउडस्पीकर पर अजान को लेकर सोशल मीडिया पर टिप्पणी की थी, जिसे लेकर भारी विवाद हुआ था। उस समय एक मौलवी द्वारा उनके खिलाफ फतवा तक जारी किया गया था। जवाब में सोनू निगम ने अपना सिर मुंडवाकर विरोध जताया था, जिससे मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया था।
सूफी संगीत पर दिए गए इस नए बयान ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि सोनू निगम की बेबाक राय अक्सर लोगों को सोचने पर मजबूर कर देती है, लेकिन साथ ही विवादों को भी जन्म देती है। फिलहाल यह बहस सोशल मीडिया पर तेज है और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

