हिमाचल में दिल दहला देने वाली घटना: अमरूद चुराने पर बच्ची को रेलिंग से बांधा, आरोपी पर FIR दर्ज
हिमाचल प्रदेश के शिमला से एक चौंकाने वाली और अमानवीय घटना सामने आई है, जहां एक छोटी बच्ची को अमरूद चुराने के आरोप में सीढ़ियों की रेलिंग से बांध दिया गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
यह घटना ऊना जिले के बहडाला गांव की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, एक प्रवासी मजदूर परिवार की बच्ची ने पड़ोस के बगीचे से कुछ अमरूद तोड़ लिए थे। इसी बात से गुस्साए व्यक्ति, जो एक रिटायर्ड फौजी बताया जा रहा है, ने बच्ची को पकड़ लिया और उसे रस्सी या जंजीर से घर की सीढ़ियों की रेलिंग से बांध दिया।
वीडियो में बच्ची लगातार रोती हुई और मदद की गुहार लगाती दिखाई दे रही है। वह बार-बार “अंकल बचा लो… अंकल बचा लो” कहती सुनाई देती है, जबकि आरोपी उस पर चोरी का आरोप लगाते हुए उसे छोड़ने से इनकार करता है। यह वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।
घटना का वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने तुरंत संज्ञान लिया। आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 115 (2) और 127 (2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी से पूछताछ भी शुरू कर दी है और मामले की गहन जांच जारी है।
इस बीच, इस मामले पर Himachal Pradesh Women Commission ने भी संज्ञान लिया है। आयोग की चेयरपर्सन विद्या नेगी ने बताया कि बच्ची का स्थानीय अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया गया है और उसके बयान भी दर्ज किए गए हैं।
घटना के दौरान एक स्थानीय व्यक्ति, जिनकी पहचान मर्चेंट नेवी के कैप्टन Rohit Jaswal के रूप में हुई है, ने बच्ची की चीखें सुनकर तुरंत हस्तक्षेप किया। उन्होंने बच्ची को आरोपी के चंगुल से छुड़ाया और इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचित किया। उनकी इस तत्परता से बच्ची को समय रहते मदद मिल सकी।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने बाद में अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी भी मांगी है, लेकिन कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी। अधिकारियों ने इस घटना को बेहद गंभीर और अमानवीय करार दिया है और कहा है कि बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि किसी भी स्थिति में बच्चों के साथ क्रूरता या हिंसा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा करना हर नागरिक और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि गुस्से या आवेश में आकर कोई व्यक्ति किस हद तक जा सकता है, और कैसे एक छोटी सी गलती का इतना बड़ा और अमानवीय परिणाम हो सकता है।

